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डरे कोरोना भागे- डी कुमार –अजस्र

प्रस्तुत हिंदी स्वरचित गीत या गेय कविता –डरे कोरोना… भागे … डी कुमार–अजस्र द्वारा भारत देश मे 100करोड़ लोगों के कोरोना टीका लगने के उपलक्ष्य में मनाए गए उत्सव के क्रम में है ।

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डरे कोरोना….भागे..

Corona rescue related ||कोरोना बचाव सम्बंधित
Corona rescue related ||कोरोना बचाव सम्बंधित

सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम,
दुनियां में हुए आगे ।
एक सुरक्षा कवच बना ,
जहां ,डरे कोरोना भागे ।
ताली , थाली, लॉकडाउन सब ,
जनता के बने हथियार ।
दुनियां केवल ताकती रह गई,
वैक्सीन हमारी हुई तैयार ।
शासन भी मुस्तैद खड़ा रहा,
सजग प्रशासन जागे ।
सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम,
दुनियां में हुए आगे ।
एक सुरक्षा कवच बना ,
जहां ,डरे कोरोना भागे ।

कुछ सख्ती,कुछ प्यार मोहब्बत,
साथ सभी का बना रहा ।
एक-एक का मिला सहयोग ,
हाथ सभी का लगा रहा ।
सब मिल एक प्रयासों से ही ,
हम असीम ऊंचाइयां लांघे।
सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम,
दुनियां में हुए आगे ।
एक सुरक्षा कवच बना ,
जहां ,डरे कोरोना भागे ।

साठ ,पैतालीस, अठारह का ,
समय निर्धारण मिसाल बना ।
मात्र उम्र नहीं समता का भी ,
जनता-मन विश्वास जमा ।
वयस्क सभी ही बने सुरक्षित,
जब टीका-कोरोना लागे ।
सौ करोड़ , हां सौ करोड़ हम,
दुनियां में हुए आगे ।
एक सुरक्षा कवच बना ,
जहां ,डरे कोरोना भागे ।

बचपन भी हो निकट भविष्य ,
सुरक्षा चक्र के घेरे में ।
सभी भारतीय तब ही सुरक्षित ,
कोरोना के पग-फेरे से ।
स्वस्थ हो भारत ,सदा सुरक्षित,
‘अजस्र ‘ दुआ यही मांगे ।
सौ करोड़ , हां, सौ करोड़ हम,
दुनियां में हुए आगे ।
एक सुरक्षा कवच बना ,
जहां ,डरे कोरोना भागे ।

✍️✍️ *डी कुमार–अजस्र(दुर्गेश मेघवाल,बून्दी/राज.)*

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