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दशहरा पर कविता

दशहरा पर कविता

राम रावणको मार,धर्मका किये प्रचार,
बढ़ गया सत्य सार ,यही है दशहरा।

देव फूल बरसायें ,जगत सारा हर्षाये,
गगन-भू सुख पाये,यही है दशहरा।

खुशहुये भक्तजन,कहेसभी धन्य-धन्य,
होइ के महा मगन ,यहीं है दशहरा।

सुनो मेरे प्यारे भाई ,बुराई पर अच्छाई,
जाता जब जीत पाई ,यहीं है दशहरा।

छल-कपट टारदो,जन-जनको प्यार दो,
अवगुण सुधार लो , यहीं है दशहरा।

सदा हरिगुण गाओ,सुख शुभ उपजओ,
सबको गले लगाओ , यही है दशहरा।

चलो सत्य राह पर,कर्म हो निगाह पर,
दौड़ो नहीं चाह पर ,यहीं है दशहरा

मनविषयों से मोड़,व्देष-दम्भ मोह छोड़,
परहित में हो दौड़ , यहीं है दशहरा।

अंदरसे शीघ्र जाग,प्रभु सुभक्ति में लाग,
आपसी बढ़ाओ राग ,यहीं है दशहरा।

सत्संगमें रहे चाव,रखो समता का भाव,
छोड़ो सकल दुराव , यहीं है दशहरा।

बाबूराम सिंह कवि
बडका खुटहाँ, विजयीपुर
गोपालगंज (बिहार)841508

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