KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

दीये की अभिलाषा पर कविता

0 144

दीये की अभिलाषा पर कविता

शुभ दीपावली

मैं दीया हूँ
अंधकार मिटाना
चाहता हूँ
प्रकाश फैलाना
चाहता हूँ
तूफानों से
जूझ रहा हूँ
कभी जल
कभी बुझ रहा हूँ
तेल है काफी
बात्ती भी है
तेज हवाएँ
सताती भी हैं
मुझे बुझाना
चाहती भी हैं
मुझे खूब
फङफङाती भी हैं
लेकिन मैं
जलना चाहता हूँ
सारा अंधकार
निगलना चाहता हूँ

-विनोद सिल्ला

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.