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हिंदी संग्रह कविता-देखें कौन सुमन शैया तज, कंटक पथ अपनाता है?

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देखें कौन सुमन शैया तज, कंटक पथ अपनाता है?


देश-प्रेम का मूल्य प्राण है, देखें कौन चुकाता है?
देखें कौन सुमन शैया तज, कंटक पथ अपनाता है?


सकल मोह ममता को तजकर, माता जिसको प्यारी हो।
दुश्मन की छाती छेदन को, जिसकी तेज़ कटारी हो।
मातृभूमि के लिए राज्य तज, जो बन चुका भिखारी हो।
अपने तन,मन,धन-जीवन का स्वयं पूर्ण अधिकारी हो।
आज उसी के लिए राष्ट्र, भुज अपने ही फैलाता है ! देखें कौन…


कष्ट-कंटकों में पड़ करके जीवन पट सीने होंगे।
कालकूट के विषमय प्याले, प्रेम सहित पीने होंगे।
एक ओर संगीनें होंगी, एक ओर सीने होंगे।
वही वीर अब बढ़े जिसे हँस-हँसकर मरना आता है। देखें कौन ..

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