KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

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देखो न मुझे बुखार है

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देखो न मुझे बुखार है

देखो न मुझे बुखार है
या ये तेरा ही खुमार है
दिल को तेरा रोग लग गया
दिल बेचारा बीमार है

धड़कने बढ़ें और कभी थमे
देखूँ जो तुम्हें तो बोलो क्या हुआ हमें
हर जगह ही तुम दिखते हो मुझे
दिल मेरा पुकारता है हर घड़ी तुझे
क्या ये सच है या है ये भरम
क्या तुझे भी ऐतबार है
देखो न मुझे बुखार है….

तेरे हाल का तुझसे क्या कहूँ
जानती हूँ तेरे दिल में मैं ही मैं रहूँ
बहके हैं कदम सांसे हैं गरम
तेरे जैसा ही तो मेरा हाल है सनम
बढ़ती धड़कन बार बार है
देखो न मुझे बुखार है…

जागता रहूँ नींद उड़ गई
बहकी बहकी सी क्यों मेरी चाल हो गई
भूख प्यास भी लगती नहीं अब
कौन है वो कहके मुझसे पूछते हैं सब
रहता दिल में कौन यार है
देखो न मुझे बुखार है…

इश्क़ का नशा हमपे चढ़ गया
दिन ब दिन यूँहीं हमारा रोग बढ़ गया
लाईलाज है ये दिल की है लगी
बदली है मोहब्बतों से सबकी ज़िन्दगी
‘चाहत’ दिल में बेशुमार है
देखो न मुझे बुखार है…..

नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

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