KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

धनतेरस(छप्पय छंद)- सुकमोती चौहान “रुचि”

छप्पय छंद
?धनतेरस?

सजा धजा बाजार, चहल पहल मची भारी
धनतेरस का वार,करें सब खरीद दारी।
जगमग होती शाम,दीप दर दर है जलते।
लिए पटाखे हाथ,सभी बच्चे खुश लगते।
खुशियाँ भर लें जिंदगी,सबको है शुभकामना।
रुचि अंतस का तम मिटे,जगे हृदय सद्भावना।
✍ सुकमोती चौहान “रुचि”
बिछिया,महासमुन्द,छ.ग.