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रूढ़ीवाद पर कविता

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रूढ़ीवाद पर कविता

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उन्होंने डाली जयमाला
एक-दूसरे के गले में
हो गए एक-दूसरे के
सदा के लिए
प्रगतिशील लोगों ने
बजाई तालियां
हो गए शामिल
उनकी खुशी में
रूढ़ीवादियों ने
मुंह बिचकाए
नाक चढ़ाई
करते रहे कानाफूसी
करते रहे निंदा
अन्तर्जातीय प्रेम-विवाह की
देते रहे दुहाई
परम्पराओं की
देखते ही देखते
ढह गया किला
सड़ी-गली
व्यवस्था का

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