Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा

0 385

धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा

धूप
HINDI KAVITA || हिंदी कविता

कोहरे की गाढी ओढनी
हिमांकित रजत किनारी लगी।
ठिठुरन का संग साथ लिया
सोई  रजनी अंधकार पगी।

ऊषा के अनुपम रंगों ने
सजाई अनुपम रंगोली,
अवगुण्ठन हटा होले से
धूप आई ,ले किरण टोली।

CLICK & SUPPORT

इठलाती बलखाती सी वो
सब ओर छा रही है, धूप।
नर्म सी सबको सहलाती
भाया इसका रूप अनूप ।

नव जीवन  संचार करती
सृष्टि क्रम बाधा सब हरती
हर पल हर घड़ी तत्पर रह
रवि का साथ निभाती धूप।

कर्म पथ चलने को कहती,
बचाती है ,ठिठुरन से धूप ।
बड़ी सुहानी ,प्यारी लगती
इस ठंड में ,गुनगुनाती धूप ।

पुष्पा शर्मा “कुसुम”

Leave A Reply

Your email address will not be published.