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कवि बाबू लाल शर्मा,बौहरा द्वारा रचित दीपक पर 7 दोहे जो मानव को शिक्षा दे रही है ,आप जरुर पढ़िए

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दीपक

  (दोहा छंद)

    

एक दीप बस एक ही, डरे न तम से मीत।
शेर अकेले  देखिये, मन तुम रहो अभीत।।
धरा  एक दीपक जले, तारक  गगन अनंत।
हिम्मत  कभी  न  हारता, तेल बाति पर्यंत।‌।
 
दीपक से सीखो मनुज,जलना पर उपकार।
तभी देवता को लगे, दीपक  प्रिय  करतार।।
 
दीपक  से  दीपावली, खुशियों  का त्यौहार।
दीप बिना रोशन नहीं,दीपक विविध प्रकार।।
 
तम  है  दीपक के तले, परहित की पहचान।
अपने दुख को भूलिए,दुख दुनिया के जान।।
 
धन्य दीप जीवन तुम्हें, रोशन करे जहान।
दीप  रूप  तारे  धरे, सूरज   चंद्र  महान।।
 
पल  दो पल दीपक जिये, करें देह का दान।
जलकर भी दे रोशनी, मनुज सीख विज्ञान।।
 

बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा,दौसा, राजस्थान

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