डॉ सुशील शर्मा द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित सुंदर दोहे

दीपावली पर दोहे
डॉ सुशील शर्मा
नई ज्योति के पंख हों ,ज्योतिर्मय हर द्वार।
तिमिर न अब बाकी बचे ,नेह भरा संसार।
आज अमावस रात है ,तिमिर हँसे चहुँओर।
एक दीप जब जल उठा ,उजियाले हर छोर।
दीप पंक्तियाँ लग गईं ,घर में हुई उजास।
ज्योति शिखाओं से झरा ,हर मन में विश्वास।
अँधियारी मावस हँसे ,तमस लिए आधार।
रश्मिकिरण लेकर चलीं ,खुशियों की बौछार।
लिए वर्तिका प्रेम की ,विश्वासों का तेल।
दीपोत्सव में हो गया ,मन से मन का मेल।
नन्ही ज्योति जल रही ,लिए चुनौती हाथ।
अन्धकार के राज में ,किसका होगा साथ ?
दीपों से अब कीजिये ,यामा का शृंगार।
वसुधा को जगमग करे ,दीपों का त्यौहार।
दीवाली देती हमें ,नेह प्रेम सन्देश।
मन से मन को जोड़ती ,स्वच्छ बना परिवेश।
अन्धकार के राज में ,ज्योति बनी उम्मीद।
एक दीप उस द्वार पर ,सोता जहाँ शहीद।
मिट्टी के दीये बना ,सोचा करे कुम्हार।
काश आज दीपावली ,आये उसके द्वार।
डॉ सुशील शर्मा
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