KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता ,जो हमें आपस में मिलजुल कर रहने का संदेश देती है

शुभ दिन आज दीपोत्सव आया
अपने संग खुशी उमंग को लाया।
सजा-धजा हर घर का कोना
रंग-बिरंगी खुशियाँ है लाया।
आपसी बैर कटुता को मिटाकर
मिलजुल कर रहने को सिखाया।
सत्य,धर्म,तप,त्याग के बल पर
प्रभु का पर्व विजयोत्सव आया।
हँसी,खुशी सौहार्द को लेकर
पावन पर्व दीपोत्सव आया ।
रंगकर प्रेम के रंग मे मानव
एक दूजे को गले लगाया ।
भाव में भरकर हर कोई साथी
प्रेम भरा एक दीप जलाया।
बच्चे भी आनंद में डूबकर
स्नेह सागर में हमें डूबाया।
प्रभु ने भी खुशियों में रमकर
प्रेम सुधा रस खूब बरसाया ।
हँसी खुशी सौहार्द को लेकर
पावन पर्व दीपोत्सव आया।
रावन संहार प्रभु आये अयोध्या
बाजी बधाई मन हरसाया।
नाचो गाओ सब खुशी मनाओ
बरसों बाद ये शुभ दिन आया।
घी के दीपक घर-घर जलते
अंधकार भागा उजियारा छाया।
महालक्ष्मी के शुभ आगमन से
लोग आपसी द्वेष भूलाया ।
हँसी खुशी सौहार्द को लेकर
पावन पर्व दीपोत्सव आया ।।
  
   बाँके बिहारी बरबीगहीया