KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

दीवारे खिंचने लगी भाई भाई बीच

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दीवारे खिंचने लगी भाई भाई बीच

दीवारे खिंचने लगी,
भाई भाई बीच।
रहा प्रेम अब है कहाॅ,
काम करे सब नीच।।

खींचो मत दीवार अब,
रहने दो कुछ प्यार।
सभी यही रह जायगा,
खुशियाँ मिले अपार।।

भित्ति गिरा दो घृणा की,
बांट सभी को प्यार ।
दो दिन की है जिन्दगी,
हिल मिल रहना यार।।

प्रभु ने भेजा जगत में,
सुन्दर करने काम।
चुने सखा दीवार क्यो।
फिर क्यो डूबे नाम।।

आये हो संसार मे,
प्रभु का भजने नाम।
नही खड़ी दीवार हो,
बनते बिगङे काम।।

घृणा की दीवार गिरे,
रहे प्रेम परिपूर्ण।
सुखमय जीवन हो सखा,
मनुज ध्येय हो पूर्ण।।

पाले असंतोष नही,
चुनते क्यो दीवार।
रहना सब कुछ है यही,
अच्छा कर व्यवहार।।

मीत कहाॅ मिलते सखा
संकट मे दे साथ।
स्वार्थ की दीवार खड़ी,
छोङ भागते हाथ।।

मदद करे हर दीन की,
तोङ चलो दीवार।
दुगना होकर भी मिले
सुन ले मनवा यार।।

तेरी मेरी क्यो करे,
जाना पाँव पसार।
जल्द गिरा दीवार तुम,
हरि के हाथ हजार ।।

मदन सिंह शेखावत ढोढसर

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