दो पल के रिश्ते ,बिखरने के लिए ही बनते हैं

दो पल के रिश्ते ,बिखरने के लिए ही बनते हैं ।
यादों में बस के हर पल दिल में ही रहते हैं ।
उन लमहों को सोचकर हम
कभी हंसते हो कभी रोते रहते हैं ।
मिलते वक्त सोचा ना था कि बिछड़ जाएंगे ।
खिलते  वक्त फुल भी लगे ना कि झड़ जाएंगे ।
पर समय के दरमियां हम सब गुजर जाना है।
कुछ पाकर के कुछ खो जाना है।
तो क्यों पीर को दबाए हुए सहते ही रहते हैं ।
खुशियां जाती है गम का आभास दिलाने को।
हमको जिंदगी का कड़वा सच से मिलाने को ।
यह जानते हुए भी हम मेहमान चंद घड़ी के
कभी चमकते कभी बुझते सितारे हैं फुलझड़ी के।
मुरझाना है  फूलों को तो क्यों यह महकते हैं?
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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