KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

दुख की घड़ियां है दो पल की

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दुख की घड़ियां है दो पल की

दुख की घड़ियां है ,दो पल की।
फिर क्यों तेरी ,आंखें छलकी ।।
याद ना कर ,बातें कल की ….
जाने जां …जाने जां …
जानेजां …जानेजां…


माना दौर है , मुश्किल की ।
आदत नहीं तेरी ,महफिल की ।
मुस्कुरा तो जरा ,ख्वाहिश है दिल की….
जाने जां …जाने जां …
जानेजां …जानेजां…

हम भी तेरे अपने हैं ,साथ कभी न छोडेंगे।
कर ले मेरा एतबार ,रुख ना कभी मोड़ेगे ।
तुझको जो पसंद हो, ऐसा रंग घोलेंगे ।
तुमको जो ना पसंद हो ,ऐसी बात ना बोलेंगे ।
काली रतिया है दो पल की…
फिर आएंगी रातें झिलमिल की ….
याद ना कर ,बातें कल की ….
जाने जां …जाने जां …
जानेजां …जानेजां…


खा रहे हैं ये कसम ,मिलते रहेंगे हर जनम ।
प्यार ना होगा कम ,आंखें भी ना होंगे नम।।
जो तू मेरे पास है ,जिंदगी तो खास है ।
जब तू होती उदास है ,इक पल भी ना रास है ।
रास्ते हमारे मिलोंमिल की ….
फिर भी पता मंजिल की ….
मुस्कुरा तो जरा ,ख्वाहिश है दिल की ….
जाने जां …… जाने जां …..
जाने जां …… जाने जां …….

गीतकार – मनीभाई नवरत्न

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