navdurga

दुर्गा मैया पर कविता – सुशी सक्सेना

दुर्गा मैया पर कविता


आओ मईया मेरी, शेर पर होकर सवार।
क्या हो गया है, देखो तेरे जगत का हाल।

जाओ मईया जरा उस दिशा की ओर,
नफ़रत के सिवा जहां, नहीं कुछ और,
आपस में लड़ रही हैैं तेरी ये संतान,
इतनी विनती करूं मैं जोड़ के दोनों हाथ,
इनके दिलों में फिर से, जगा दे प्यार।

मां रक्तबीज का खून अभी भी बाकी है,
मानव के अंदर का हैवान अभी भी बाकी है,
वध कर दो मईया उस दानव का, फिर
देखो एक अच्छा इंसान अभी भी बाकी है,
है यही अरज हमारी, जग को रखो खुशहाल।

ग़रीबी और महामारी का फैला है प्रकोप,
देखो प्रकृति का हम सब, सह रहे कोप
माफ़ करो गलती हमारी, सब दुख करो दूर
निर्धन को धन दे दो, बाछिन को दो पूत,
झोली जो भी फैलाए, उसको देना दान।

नमन तुम्हारे चरणों में, एक मेरी भी मुराद।
सारे जग के साथ, मेरा भी करो बेड़ा पार।

( स्वरचित एवं मौलिक )
सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page