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एड्स पीड़ित – आशीष कुमार

प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक “एड्स पीड़ित” है जोकि आशीष कुमार मोहनिया कैमूर बिहार की रचना है. इसे हमारे समाज में एड्स पीड़ितों के प्रति हो रहे उपेक्षापूर्ण व्यवहार को आधार मानकर तथा विश्व एड्स दिवस के अवसर पर लिखा गया है.

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एड्स पीड़ित – आशीष कुमार

समाज समझता जिनको घृणित
कुसूर बस इतना
हैं एड्स पीड़ित
जीने की इच्छा भी
हो चुकी है मृत
असह्य वेदना सहते एड्स पीड़ित

समाज इनसे दूरी बनाए
सर्वदा तीखी जली कटी सुनाए
वसुधैव कुटुंबकम पीछे छूटा
उपेक्षा से करता है दंडित
सद्भावना की बाट जोहते
हैं दुखित एड्स पीड़ित

एड्स है असाध्य बीमारी
सुरक्षा इससे हो पूर्ण जानकारी
यौन संबंध हो जब असुरक्षित
या माता-पिता हो एचआईवी संक्रमित
रक्त हो जब इससे दूषित
संक्रमण फैलता इनसे त्वरित

पर नहीं फैलता चुंबन से
या रोगी के आलिंगन से
ना शिशु के स्तनपान से
अज्ञानता में हम कर देते
अपनेपन से उनको वंचित
तिरस्कार का दंश झेलते एड्स पीड़ित

हमें इनकी व्यथा को समझना होगा
मन के घावों को भरना होगा
अलग-थलग जो पड़ गए हैं
उन्हें मुख्यधारा में शामिल करना होगा
जीने की ललक जगेगी उनमें
होंगे प्रफुल्लित एड्स पीड़ित।

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