Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

एक लोरी- माँ के नाम

बचपन में माँ हमें लोरी सुनाती है माँ के बड़े होने पर वह रात मे सो नही पाती तब उसे सुलाने केलिए किए गये जतन का चित्रण

0 107

एक लोरी- माँ के नाम

CLICK & SUPPORT

है बात कई साल पुरानी,
माँ मुझे सुनाती लोरी सुहानी,
मैं फिर झट सो जाता,
सपनों में खो जाता,
लोरी गाकर करती तुकबंदी, और करती निन्दिया को बंदी,
समय ने ली अंगडाई,
प्यारी माँ की उम्र बढाई ।
अब जब थक कर माँ होती चूर,
बिस्तर पर लेट कर ताकती दूर-दूर,
मै समझ जाता माँ के मन की हूक,
मैं झट उठ जाता बिना किए फिर चूक,
जल्दी से बैठ माँ के सिरहाने,
कई जतन करता माँ को सुलाने,
लोरी गाता,सिर सहलाता,
चूमता माथा, दिल बहलाता,
निन्दिया रानी को बेचैन हो बुलाता,
आमंत्रण पाकर आ जाती निन्दिया रानी,
और फिर सो जाती मेरी मैया सयानी।

माला पहल मुंबई

Leave A Reply

Your email address will not be published.