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फिगर का दोष है मेरे नजर का नहीं

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फिगर का दोष है मेरे नजर का नहीं
कविता बहार

फिगर का दोष है मेरे नजर का नहीं

फिगर का दोष है, मेरे नजर का नहीं .
तू सोचे मुझे जहां का ,मैं वहां का नहीं.
हाय रे नखरा, उमर सतरा,लागे खतरा ।
चले पैंतरा, इस दिल पे, अब जरा जरा ।

मैग्नेट सा बदन ,खींचे मुझे,खिंचा चला जाऊं ।
चंचल ये चितवन, रोकना चाहूं, रोक ना पाऊं ।
बेसुर ताल है , बुरा हाल है ,अब तो मेरा .
चले पैंतरा , इस दिल पे , अब जरा जरा.

कनेक्टिविटी दे हॉटस्पॉट से इंकार न कर
वाईफाई ऑन पासवर्ड सेव डाटा ऑफ न कर
लाइफ सेल्फोन है जिसमे रिंगटोन है तू ही मेरा
चले पैंतरा , इस दिल पे , अब जरा जरा.

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