KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गांधी सा

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गांधी सा
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माँ ओ माँ
मुझको समझाओना
जीवन का फलसफा
कोई कहता जैसे को तैसा
कोई कहता बन गांधी सा
मेरी समझ में आता नहीं
क्या ग़लत?क्या सही?
लल्ला ओ लल्ला
जैसे को तैसा
मैं कहती नहीं है गलत
पर बनना गांधी सा आसान नहीं
निस्वार्थ जीना सबके बस की बात नही
इतिहास रचता कोई मामुली इंसान नहीं
देश पर समर्पित होना
किसी को ना आहत करना
अंग्रेजों का जुर्म सहना
मुँह से कुछ न कहना
हे राम कहते आगे बढ़ना
माँ भारती के लिए
जहर के घुट पिए
तनिक भी उफ्फ ना किए
देश पर समर्पित हुए
जैसे को तैसा करनेवाला
आहत करता कई कई बार
जान भी लेता बेदर्दी
खुद को भी करता बर्बाद
मानवता को करता तार-तार
हो सके तो गांधी बनना
सबको तू माफ़ करना
अपना चरित्र  साफ़ रखना
अहिंसा से न्याय करना
जाती है तो जाए जान
सोचो जो हो जाए सब गौतम गांधी
देश में होगी सुकून शांति
उड़ेगी प्रेम की अद्भुत  आंधी
अपने हिस्से का फर्ज निभाना
हो सके तो गांधी सा बनना
कोख मेरी भी धन्य करना।
पूनम राजेश तिवारी
नागपुर, महाराष्ट्र
९३७१११८३११
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