गाँधी




गाँधी
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जाने कितने कष्ट उठाकर गाँधी तुमने नाम कमाया ।
एक छड़ी के बल पर तूने भारत को आजाद कराया ।।
गाँधी तुम तो सदा रहे थे तन अरु मन दोनों से सच्चे ।
आज यहाँ के मानव देखो बात बात पर लगते कच्चे ।।
गाँधी देखो तेरी फोटो हैं लगी हुई दरबारों में ।
है रोज हारता सत्य झूठ से खुले आम बाजारों में ।।
गाँधी देखो तेरे वंशज ही तेरा अपमान कर रहे ।
तेरी तस्वीरों के आगे रिश्वत का व्यापार कर रहे ।।
गाँधी आज तुम्हारा नाम रिश्वत का पर्याय बन गया ।
देश कहीं भी जाये अपना घर भरना उद्देश्य रह गया ।।
नहीं सता तू बापू को सुन उनकी आत्मा धिक्कारेगी ।
तेरे करमों के ऊपर सुन तेरी सन्तति पछतायेगी ।।
पहले आचरण शुद्ध करें हम तभी गाँधी बन पायेंगें ।
देश हितों का ध्यान रखोगे तब तो बापू कह लायेंगें ।।
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आदेश कुमार पंकज
रेणुसागर सोनभद्र
उत्तर प्रदेश
मोब.न. 9140189159
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