KAVITA BAHAR
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गणेश  वंदन-चौपाई छंद

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गणेश  वंदन-चौपाई छंद

प्रथम नमन गजानन प्यारे।
सकल सँवारो काज हमारे।।1

शिव प्रिय गौरी के तुम जाए।
एकदन्त गणपति कहलाए।।2

मोदक मिसरी भोग लगाऊँ।
सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ।।3

हरना मेरी तन मन पीरा।
सृजन करूँ बिन हुए अधीरा।।4

मेरा सृजन बने हितकारी।
दूर करो प्रभु भाव विकारी।।5

पूज प्रथम मैं तुम्हें मनाऊँ।
वंदन हित चौपाई गाऊँ।।6

विघ्न पड़े  नहि प्रभु मम लेखन।
चाहूँ नित सत्यार्थ प्रलेखन।।7

शिव सुत गौरी नंदन देवा।
गणपति करहुँ तुम्हारी सेवा।।8

रिद्धि सिद्धि के संग पधारो।
हे प्रभु मेरे लेख सुधारो।।9

गणनायक हे देव गणेशा।
सेवा तेरी करूँ हमेशा।।10

आप लेखनी साधो मेरी।
श्रद्धा मेरी रहे घनेरी।।11

बाबू लाल शर्मा “बौहरा*
सिकंदरा, दौसा राजस्थान

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