KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गणतंत्र गाथा

0 874

गणतंत्र गाथा

पुरा कहानी,याद सभी को, मेरे देश जहाँन की।
कहें सुने गणतंत्र सु गाथा, अपने देश महान की।

सन सत्तावन की गाथाएँ,आजादी हित वीर नमन।
रानी झाँसी नाना साहब, ताँत्या से रणधीर नमन।

तब से आजादी तक देखो,युद्व रहा ये जारी था।
वीर हमारे नित मरते थे, दर्द गुलामी भारी था।

जलियाँवाला बाग बताता, नर संहार कहानी को।
भगतसिंह की फाँसी कहती, इंकलाब की वानी को।

शेखर बिस्मिल ऊधम जैसे, थे कितने ही बलिदानी।
कितने जेलों में दम तोड़े, कितनों ने काले पानी।

बोस सुभाष गोखले गाँधी, कितने नाम गिनाऊँ मैं।
अंग्रेजों के अनाचार के, कैसे किस्से गाऊँ मैं।

गाँधी की आँधी,गोरों के,आँख किरकिरी आई थी।
विश्वयुद्ध से सबक मिला था,कुछ नरमाई आई थी।

आजादी हित डटे रहे वे, देशभक्त सेनानी थे।
क्रांति बीज से फसल उगाते,मातृभूमि अरमानी थे।

आखिर मे दो टुकड़े होके,मिली देश को आजादी।
हिन्दू मुस्लिम दंगे भड़के, खूब हुई थी बरबादी।

संविधान परिषद ने ऐसा,नया विधान बनाया था।
छब्बीस जनवरी सन पचास,में लागू करवाया था।

बना देश गणतंत्र हमारा,खुशियाँ के त्यौहार मने।
राष्ट्रपति व संसद भारत के,मतदाता हर बार चुने।

आज विश्व मे चमके भारत,ध्रुवतारे सा बन स्वतंत्र।
करें वंदना भारत माँ की, रहे सखे अमर गणतंत्र।

लोकतंत्र सरताज विश्व में,लिखे शोध संविधान है।
लाल किले लहराय तिरंगा, ऐसे लिए अरमान है।

उत्तर पहरेदार हमारा, पर्वत राज हिमालय है।
संसद ही सर्वोच्च हमारी, संवादी देवालय है।

आज विश्व में भारत माँ के,घर घर मे खुशहाली है।
गणतंत्र पर्व के स्वागत को, सजे आरती थाली है।

सेना है मजबूत हमारी, बलिदानी है परिपाटी।
नमन करें हम भारत भू को,और चूमलें यह माटी।

गणतंत्र रहे सम्मानित ही, मेरे प्राण रहे न रहे।
ऊँचा रहे तिरंगा अपना, मन में यह अरमान रहे।


✍✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
🏉🏉🏉🏉🏉🏉🏉

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.