गर्दिश में सितारे हों

(गर्दिश में सितारे हों)

221  1222  22 // 221  1222  22

गर्दिश में सितारे हों जिसके, दुनिया को भला कब भाता है,
वो लाख पटक ले सर अपना, लोगों से सज़ा ही पाता है।

मुफ़लिस का भी जीना क्या जीना, जो घूँट लहू के पी जीए,
जितना वो झुके जग के आगे, उतनी ही वो ठोकर खाता है।

ऐ दर्द चला जा और कहीं, इस दिल को भी थोड़ी राहत हो,
क्यों उठ के गरीबों के दर से, मुझको ही सदा तड़पाता है।

इतना भी न अच्छा बहशीपन, दौलत के नशे में पागल सुन,
जो है न कभी टिकनेवाली, उस चीज़ पे क्यों इतराता है।

भेजा था बना जिसको रहबर, पर पेश वो रहज़न सा आया,
अब कैसे यकीं उस पर कर लें, जो रंग बदल फिर आता है।

माना कि जहाँ नायाब खुदा, कारीगरी हर इसमें तेरी,
पर दिल को मनाएँ कैसे हम, रह कर जो यहाँ घबराता है।

ये शौक़ ‘नमन’ ने पाला है, दुख दर्द पिरौता ग़ज़लों में,
बेदर्द जमाने पर हँसता, मज़लूम पे आँसू लाता है।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; निवास स्थान - तिनसुकिया (असम) रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं। Blog - https://www. nayekavi.blogspot.com