हिन्दी कविता: गीता ग्रंथ है पवित्र पावन- मनीभाई नवरत्न

गीता ग्रंथ है पवित्र पावन, गीता ज्ञान का सागर ।

श्रीकृष्ण ने सुनाई अर्जुन को,वह युग था द्वापर ।

समय बदल गया पर, बदली ना गीता की महिमा ।
आज भी घटती जग में देखो,तोड़ काल की सीमा ।

कलयुग में घट जायेगी , धर्म, कर्म और मानवता ।
न्याय मिले उसी को ही , जिसके पास हो धनसत्ता।

डूबेगा सकल सृष्टि , चिंता के सागर में ।
व्याधि होगी विभिन्न,तन के इस गागर में ।

माता-पिता अनादर होंगे, पूजी जाएगी पत्थर।
तीस वर्ष ही जी सकेंगे, उम्र कम होगी घटकर ।

दूषित होगा जल, हर तरफ पड़ेगी सूखा।
भोगी होगा मानव, फिर भी रहेगा भूखा ।

(क्रमशः)

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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