कविता 28 गुलाब की जवानी- मनीभाई नवरत्न

कविता  28
गुलाब की जवानी
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ये गुलाब का फूल
ना जाने कब से ,
किताब में दबा हुआ था।
सूख चुका है अब
ये घुटन से ।
इसकी लालिमा बदल गई
धीरे धीरे समय के साथ
कालिमा में।
खुशबू बिखरके रह गई
किताबी समां में ।
इसकी दास्तां कभी-कभी,
यादों में आ जाती है,
मुस्कुराहट बनके।
कल इसकी ताजगी ने
सब को लुभा था ।
प्यार से हर किसी ने
इसको चुमा था ।
पर नहीं अब वो बातें
क्या शबाब में कमी है?
मानो तो ,
इस गुलाब की जवानी
बिछड़ के चली गई ।
अब किसी और गुलाब के,
चर्चे हैं गली गली ।
पुरानी यादों में
खोया ये गुलाब
बिखरा दी है आंसू
तभी तो किताब में नमी है।
गुलाब का फूल सा है
सबकी यहां कहानी।
मनमोहक सी आती
सबकी यहां जवानी।
खिलना है, बिखरना है।
आना है, जाना है,
इसी का नाम तो है जिंदगानी।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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