KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गुरू का गुणगान

गुरू पूर्णिमा पर कविता

0 595

गुरू का गुणगान

गुरू की महिमा है अपार,
गुरू से हम गुरु से संसार।
गुरू है ज्ञान का भंडार,
गुरू सिखलाए उपकार।
शिष्य के लिए गुरू है सारा जहाँ,
मैं हर- पल करूँ, गुरू का गुणगान।

मुश्किलों में काम आए गुरू का ज्ञान,
धन्य है गुरू हमको दिया शिक्षा – दान।
करूँ मैं सेवा गुरू का नित,
मिले हर-पल जीवन में जीत।
गुरू के आशिर्वाद से मिला पहचान,
मैं हर-पल करूँ, गुरू का गुणगान।

निःस्वार्थ भाव से करूँ गुरू की पुजा,
मन में रहे है गुरू और न कोई दूजा।
अच्छाई – बुराई का दे हमें शिक्षा,
मनन से करें हम उचित समीक्षा।
दोस्तों गुरू मिले जिसे वो है भाग्यवान,
मैं हर – पल करूँ, गुरू का गुणगान।

गुरू सिखाते अहिंसा का करो चयन,
पर-सम्मान में शुद्ध करो नयन।
क्रोध – घमंड को करो दूर,
बनके ज्ञानी न करो गुरूर।
कोई बना रंक तो कोई है सुल्तान,
मैं हर-पल करूँ, गुरू का गुणगान।

—- अकिल खान रायगढ़ जिला – रायगढ़ (छ. ग.) पिन – 496440.

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.