KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गुत्थियां

जीवन में कुछ कहावतें, बातें कभी कभी हास्यास्पद सी लगती हैं

0 38

*गुत्थियां*

कुछ भ्रांतियां ऐसी जो, हास्यास्पदसी लगती हैं
कहावतें भी जीवन का, प्रतिनिधित्व करती हैं।।
ज़मीं पे गिरी मिठाई को, उठाकर नहीं खाना है,
वो बोले मिट्टी की काया, मिट्टी में मिल जाना है।।

बंदे खाली हाथ आए थे खाली हाथ ही जाएंगे,
फिर बेईमानी की कमाई, साथ कैसे ले जाएंगे।।
रात दिन दौलत, कमाने में ही जीवन बिताते हैं,
वो मेहनत की कमाई झूठी मोह माया बताते हैं।।

पति-पत्नी का जोड़ा, जन्म-जन्मांतर बताते हैं,
फिर क्यों आये दिन, तलाक़ के किस्से आते हैं।।
सुना है बुराई का घड़ा एक न एकदिन फूटता है,
फिर बुरे कर्म वालों का, भ्रम क्यों नहीं टूटता है।।

ऊपर वाले के हाथों की कठपुतली मात्र हैं हम,
फिर क्यों लोग, स्वयं-भू बनने का भरते हैं दम।।
उसने भू-मण्डल, मोहक कृतियों से सजाया है,
फिर क्यों उसके अस्तित्व पर सवाल उठाया है।।

राकेश सक्सेना, बून्दी, राजस्थान
9928305806

Leave A Reply

Your email address will not be published.