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हमारी होली – आशीष बर्डे

रचना होली उत्सव के उद्देश्य और महत्व का चित्रांकन को प्रदर्शित करती है

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हमारी होली – आशीष बर्डे

holi
holi

रंगो में तु रंग मिलाकर
रंगीन हो जा स्वयं को रंगकर

आग लगाओं क्रोध को
भस्म कर दो मोह को
छोड़ के बेरंग दुनिया को
आनंद में रंग दो तन मन को

रंगो में तु रंग मिलाकर
रंगीन हो जा स्वयं को रंगकर

खुशीयो का रंग चडाकर
दुखो का चोला छोड़कर
उल्लास में स्वयं भिगकर
हर्षित कर दो जन जन को

रंगो में तु रंग मिलाकर
रंगीन हो जा स्वयं को रंगकर

स्वभाव कर लो अमृतमयी
बैराग चोड़कर दूर कही
हर जीव्हा को मिष्ठान से भरकर

आशीष बर्डे (khumen)

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