KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

हिमालय कर रहा हुंकार है – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम “

इस कविता में कवि ने प्राकृतिक आपदाओं के माध्यम से मानव को जागृत करने की एक कोशिश की है |
हिमालय कर रहा हुंकार है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम “

0 137

हिमालय कर रहा हुंकार है – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम “

हिमालय कर रहा हुंकार है

मानव ने किया उस पर प्रहार है

कभी ग्लेशियर का टूटना

कभी बाढ़ का दिखता प्रभाव है

कभी आसमानी बिजली चीखती

कभी सुनामी का प्रचंड वार है

कोरोना ने सारी सीमाएं तोड़ दीं

मानव अपने किये पर शर्मशार है

कभी ज्वालामुखी है चीखता

कहीं गृहयुद्ध की मार है

सुपारी किलर खुले आम घूमते

चीरहरण की घटनाएं बेशुमार हैं

संवेदनाएं दम हैं तोड़तीं

मानवता खुद पर शर्मशार है

चीख – पुकार का ये कैसा दौर है

हर एक शख्स हुआ लाचार है

मानव जीवन हुआ कुंठाओं का समंदर

इंसानियत हुई बेज़ार है

रिश्ते निभाने का अब चार्म न रहा

बिखरा – बिखरा सा मानव का संसार है

हिमालय कर रहा हुंकार है

मानव ने किया उस पर प्रहार है

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.