KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी संग्रह कविता-हिम्मत कभी न हारो

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हिम्मत कभी न हारो


तुम मनुष्य हो, शक्ति तुम्हारे जीवन का संबल है।
और तुम्हारा अतुलित साहस गिरि की भाँति अचल है।
तो साथी केवल पल भर को माया मोह बिसारो। हिम्मत…


मत देखो कितनी दूरी है, कितना लम्बा मग है।
और न सोचो साथ तुम्हारे, आज कहाँ तक जग है।
लक्ष्य-प्राप्ति की बलिदेवी पर, अपना तन-मन वारो । हिम्मत…


आज तुम्हारे साहस पर ही मुक्ति सुधा निर्भर है।
आज तुम्हारे स्वर के साथी कोटि कण्ठ के स्वर हैं।
तो साथी बढ़े चलो मार्ग पर आगे सदा निहारो। हिम्मत…

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