KAVITA BAHAR
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हिन्दी का शृंगार

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हिन्दी का शृंगार


आ सजनी संग बैठ
आज तुझे शृंगार दूँ
मेरी प्रिय सखी हिंदी
मैं तुझको संवार दूँ ।

कुंतिल अलकों के बीच
ऊषा की सजा कर लालिमा,
मुकलित कलियों की वेणी
जूड़े के ऊपर टांग दूँ।
आ सजनी..।

ईश वंदन बेंदी शीशफूल
पावन स्तुतियों के कर्ण फूल,
अरुण बिंदु सजा भाल
गहन तम का अंजन सार दूँ।
आ सजनी..।
नथनी पे सजा दूँ तेरे
सद्भावों के सुन्दर मोती,
अधरों की सुन्दर लाली
को
स्वर की मधुर झनकार दूँ।
आ सजनी…।
सुन्दर कण्ठहार सजा
मातृभूमि यशगान,
बाहों का भूषण बन जाये
वीरों के शौर्य का बखान।
छापे तेरे शुभ्र वस्त्र पर
अरिरक्त के छाप दूँ।
आ सजनी …।
अनुपम सजीला हार
बन जाये शृंगार  रस,
संयोग वियोग के भावों
से सज जाये  आभूषण
प्रेम की अनोखी राह
के  राज सारे खोल दूँ।
आ सजनी..।

कोमल भावों के कंगन
किंकणी की शोभा संवार,
पद नूपुर से बज जाये
प्यार की मधुर झंकार।
मैं न्यौछावर तेरा यश गूँजे
तन मन तुझ पर वार दूँ।

पुष्पा शर्मा”कुसुम”

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