KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

हिन्दी कविता : नंद नयन का तारा है,विधा तांटक छंद,डिजेन्द्र कुर्रे

0 146

नंद नयन का तारा है

भाद्रपद कृष्ण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी Bhadrapada Krishna Sri Krishna Janmashtami
भाद्रपद कृष्ण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी Bhadrapada Krishna Sri Krishna Janmashtami

★★★★★★★★★★★
कोयल कूके जब अमुवा पर,
मन भौंरा इठलाता है।
तान बाँसुरी की मधुरिम सी,
कान्हा सरस् बजाता है।

श्याम रंग में डूबी श्यामल,
राधा क्यूँ अकुलाती है।
तड़प कभी तो कभी प्रीति की,
विरहन गीत सुनाती है।

गोकुल का गइया चरवाहा,
माखन जिसको प्यारा है।
मातु यशोदा का ललना है,
नंद नयन का तारा है।
~~~~~~~★★★★★~~~~
रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822है

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.