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हिंदी राजभाषा- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता में हिंदी राजभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला गया है |
हिंदी राजभाषा- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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हिंदी राजभाषा- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

जैसी लिखी ये जाए
वैसी पढ़ी ये जाए

कर्णप्रिय ये भाषा
इससे नहीं निराशा

शब्दों को है संजोये
सभी भाषाओं को है पिरोये

विश्व धरा पर हमारी
पहचान है ये भाषा

विश्व प्रचलित ये भाषा
इससे नहीं निराशा

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

इस परे हमें हो गर्व
चाहे समर्पण सर्व

इसका करैं हम सम्मान
हमारी यह पहचान

अन्य भाषाओं को
अपनाया है इसने

विश्व बंधुत्व का सपना
दिखाया है इसने

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

नेपाली हो या उर्दू
फारसी हो या अंग्रेजी

आँचल में अपने सबको
दुलारती ये भाषा

पुकारती है हमको
मातृभूमि हमारी

करो वंदना सब मिलकर
राजभाषा हिंदी हमारी

हो जाए जाने सफल
करैं मातृभाषा का आचमन

इसे विश्व रंग पहनायें
विश्व धरा पर खिल ये जाए

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

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