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हिंदी कविता-ज्योति यह जले

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ज्योति यह जले


सूत्र संगठन सँभाल, ज्योति यह जले।
कोटि-कोटि दीप-माल ज्योति यह जले।


राष्ट्र अंधकार के विनाश के लिए,
चिर अतीत के धवल प्रकाश के लिए।
बुद्धि के, विवेक के विकास के लिए
वृद्धि के समृद्धि के प्रयास के लिए।
त्याग की लिए मशाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन…


राष्ट्र की अखण्ड साधना अमर बने,
प्राण-प्राण-कंठ की पुकार एक हो।
राष्ट्र की नवीन कल्पना सँवारने,
योजनानुसार पुण्य सर्जना घने।
ले विमुक्ति गर्व भाल, ज्योति यह जले।सूत्र संगठन…


कोटि-कोटि कंठ की पुकार एक हो,
कोटि-कोटि बुद्धि का विचार एक हो।
कोटि-कोटि प्राण का श्रृंगार एक हो,
एक ध्येय और जीत-हार एक हो।
राष्ट्र को बना निहाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन…



एक बार दुग्ध से स्वदेश महमहा उठे,
एक बार फिर बहार लहलहा उठे।
यश-सुगन्धि से स्वदेश महमहा उठे,
राष्ट्र का विजय निशान गहगहा उठे।
जगमगा विशाल भाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन…

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