हिंदी दिवस विशेष: हिंदी बनी घर की दासी-मनीभाई ‘नवरत्न’

हिंदी बनी घर की दासी-मनीभाई ‘नवरत्न’

अंग्रेजी दिवस, फ्रेंच दिवस
या फिर मनाते चीनी दिवस
न देखा ,न सुना, न जाना
सिवाय हिन्दी के हिंदुस्तान में ।
हिंदी बनी घर की दासी ।
क्या फिक्र है हमें जरा सी?
कोमल हृदय मन मस्तिष्क में ,
चला रहे हैं हथौड़ा अंग्रेजियत के
जन्म से ही रिश्ते के शब्दों में
खो दिया मां- बाबूजी का प्यार।
अभिवादन में आशीष और दुलार।
नर्सरीे से ही क्लिष्ट भाषा से
जोड़ रहे हैं अबोध के
भविष्य की गाथा ।
मातृभाषा की अवहेलना कर
अपनाते तरह-तरह के हथकंडे ।
न्यूज़ पेपर , इंटरव्यू , नावेल,
राइम से मूवी तक वक्त बिताते।
सहज मुख टेढ़ा करते ,
कैसी झूठी शान दिखाते।
बन चुके हैं भाषाई खच्चर
हालत धोबी के कुत्ते सी
क्या ऐसे दिलाएंगे हिंदी को सम्मान?
जहां पल-पल अस्मिता लुटती
मिटती ,बिगड़ती हिन्दी की तस्वीर।
इसके बावजूद क्या सामर्थ्य है
विश्वभाषा बनने की?
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़