हिन्दी पर कविता – बाबूलाल शर्मा


बाबूलालशर्मा,विज्ञ
. मनहरण घनाक्षरी
. *हिन्दी*
. —+—
‘विज्ञ’ छन्द नवगीत,
हिंदी देश प्रेम प्रीत,
जैन बौद्ध हिंदु रीत,
👌देश क्षेत्र छानिए।

सूर से कबीर सन्त,
जायसी से मीरा पंत,
हिंदी पुष्प कवि वृंत,
👌भाव पहचानिए।

सम्पदाई व्याकरण,
संस्कारित आचरण,
छन्द गीत आभरण,
👌भव्यभाव जानिए।

भारती के भाल बिंदी,
देवभाषा धिया हिन्दी,
राष्ट्रीय एकता हित,
👌मातृ भाषा मानिए।
. —+—
✍©
बाबू लाल शर्मा, बोहरा, विज्ञ
सिकन्दरा, दौसा, राजस्थान
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