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हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है

प्रस्तुत कविता हिंदी भाषा का महत्व पर लिखी गई है।

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हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है


देवनागरी लिपि से सजी हिन्दी,
सब भाषाओं के माथे की बिंदी ,
सरस, मधुरिम, सा बहे कालिन्दी,
गर्व कराती हिन्दुस्तान की हिन्दी |
ककहरा देखो वर्णो का मानसरोवर है |
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |
काव्य में नवरस शोभा बढ़ाये ,
स्वर भी वाक्यो में ऐसे जुड़ जाये,
गद्य की शोभा भाषाशैली से,
छंद-चौपाई से सज-धज कर आये |
अलंकार की छटायें कितनी मनोरम है |
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |
भारतेन्दु युग में समृद्ध हुई,
द्विवेदी युग में फूली वृद्ध हुई,
व्याकरण से परिष्कृत शुद्ध हुई,
आधुनिक युग में हिन्दी प्रबुद्ध हुई |
शब्द शक्ति, शब्द गुण वाक्य में अगोचर है |
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |
लोकोक्ति कहावते और मुहावरे,
पर्यायवाची शब्दों से मोती बिखरे,
व्यापक निघंटु संदेह हरे,
हिन्दी की अनेकार्थी सब से परे |
सब लोगो को जोड़ने संविधान भी सहोदर है |
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |
सूर तुलसी की वाणी हिन्दी,
ब्रज,अवधि,खड़ी या सिन्धी,
पन्त, महादेवी, माखन,निराला,
द्विवेदी की संस्कारी हिन्दी |
हिन्दी भाषा संस्कृति लाती घर -घर है,
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |
कभी चांद दुल्हन बन जाए,
मधुकर प्रेमी बन इतराये ,
कभी चेहरा चन्द्र बन जाए ,
डालो पर जाकर इतराये |
सब जाति -धर्मो की भाषा हिन्दी फरहर है |
हिन्दुस्तान की हिन्दी सरस मनोहर है |


मोहम्मद अलीम
बसना जिला-महासमु़ंद छत्तीसगढ़

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