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हम कहाँ गुम हो गये

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हम कहाँ गुम हो गये

हम कहाँ गुम हो गये
मोह पाश में हम बंधे,
नयनों मे ऐसे खो गये।
रही नहीं हमको खबर,
हम कहाँ गुम हो गये।।
इंद्र धनुष था आँखों में,
रंगीन सपनों में खो गये।
प्रेम की मूक भाषा में,
हम कहाँ गुम हो गये।।
कशिश उनमें थी ऐसी,
बेबस हम तो हो  गये।
कुछ रहा ना भान हमें,
हम कहाँ गुम हो गये।।
डूबे प्यार के सागर में,
हम गहराई में खो गये।
इस प्यारे अहसास में,
हम कहाँ गुम हो गये।।
दिनांक-31 जनवरी,2019
मधु सिंघी,नागपुर(महाराष्ट्र)
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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