KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

हम किधर जा रहे हैं ?

0 196

शीर्षक : हम किधर जा रहे हैं ?
*********************
क़यास लगाए जा रहे हैं,
कि हम ऊपर उठ रहे हैं,
क़ायम रहेंगे ये सवालात,
कि हम किधर जा रहे हैं?

कल, गए ‘मंगल’ की ओर,
फिर ‘चंदा-मामा’ की ओर,
ढोंगी हो गए, विज्ञानी बन,
कब लौटेंगे ‘मनुजता’ की ओर?

‘संस्कृति’, ‘संस्कार’ ठेके पर हैं,
‘देश’ और ‘शिक्षा’ ठेके पर हैं,
जनता, सिर्फ पेट भरकर खुश है,
‘सरकार’, ‘अदालत’ ठेके पर हैं।

‘आरामपसंद’, ‘पक्ष’ में बैठे हैं,
‘रज़ामंद’ लोग विपक्ष में बैठे हैं,
‘संसद’ की ‘बहस’, ‘शो-पीस’,
‘खि़दमतगार’ कुर्सी में बैठे हैं।
– शैलेंद्र कुमार नायक ‘शिशिर’

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.