KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

हम परिन्दे

0 98

हम परिन्दे

हम परिन्दे
हम है मनमौजी
सीमा न जाने।।

हम परिन्दे
घर न पहचाने
घूमे अंजाने।।

हम परिन्दे
उड़ते पंख फैला
देश न जानें ।।

हम परिन्दे
फिरे दरबदर
बना लें घर।।

हम परिन्दे
छू लेते आसमान
ऊंची उड़ान ।।
हम परिन्दे
रहें खूब उड़ते
नहीं थकते।।

राकेश नमित

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.