KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

हमर छेरछेरा तिहार-डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

0 38

गीत – हमर छेरछेरा तिहार


सुख के सुरुज अंजोर करे हे,हम सबझन के डेरा म।
हाँसत कुलकत नाचत गावत,झूमत हन छेरछेरा म।।
//1//
आज जम्मो झन बड़े बिहनिया, ले छेरछेरा कुटत हे।
कोनलईका अउ कोन सियनहा,कोनो भी नई छूटत हे।
ये तिहार म सब मितान हे,इही हमर पहचान हावय।
मनखे मन ल खुशी देवैईया,सोनहा सुघ्घर बिहान हावय।
है जुगजुग ले छत्तीसगढ़ ह, सुख सुमता के घेरा म।
हाँसत कुलकत नाचत गावत,झूमत हन छेरछेरा म।।
//2//
थोरको फुरसद आज कहा हे,घर म हमर सुवारी ल।
सुतउठ के लिपे हावय , घर अउ जमो दुवारी ल।
रंग – रंग के रोटी पीठा , घर म बईठ चुरोवत हे।
छेरछेरा बर टुकना-टुकना, ठीन्ना धान पुरोवत हे।
अबड़ मंजा करथें लईका मन,ये तिहार के फेरा म।
हाँसत कुलकत नाचत गावत,झूमत हन छेरछेरा म।
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
✍️✍️✍️डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”✍️✍️✍️

FOLLOW – kavitabahar.com


कविता बहार में प्रकाशित हुए सभी चयनित कविता के नोटिफिकेशन के लिए kavitabahar.com पर विजिट करें और हमारे सोशल मिडिया (@ Telegram @ WhatsAppFacebook @ Twitter @ Youtube @ Instagram) को जॉइन करें। त्वरित अपडेट के लिए हमें सब्सक्राइब करें।


You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.