KAVITA BAHAR
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होली-अशोक दीप

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होली-अशोक दीप

होली छटा निहारिए, बरस रहा मधु रंग ।
मंदिर-मस्जिद प्रेम से, खेल रहे मिल संग ।।
खेल रहे मिल संग, धर्म की भींत ढही है ।
अंतस्तल में आज, प्रीत की गंग बही है ।।
कहे दीप मतिमंद, रहे यह शुभ रंगोली ।
लाती जन मन पास, अरे मनभावन होली ।।

©अशोक दीप

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