Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

इंदौर की कवयित्री सुशी सक्सेना की कविताएं

0 131

यहाँ पर इंदौर की कवयित्री सुशी सक्सेना की कविताएं आपके समक्ष प्रस्तुत किये किये जा रहे हैं

सुशी सक्सेना इंदौर

ये इश्क

ये इश्क का ही तो असर है,
कि नजर भी जुबां बन जाती है।
आपकी तारीफ में कुछ कहूं,
तो ग़ज़ल बन जाती है।

ये इश्क की इंतहा, नहीं तो क्या है,
कि जिस तरफ भी देखती हूं,
आपकी सूरत नज़र आती है।

ऐसी जादूगरी है इश्क की इस खुशबू में
कि आपका नाम लेती हूं।
तो मेरी हर सांस महक जाती है।

है दर्द बहुत मगर बड़ा प्यारा है,
कि इसी के लिए ही तो,
शमां जल जल के जिए जाती है।

यूं ही लोग इश्क में फना नहीं होते,
कि सब कुछ खो कर भी,
जमाने भर की दौलत मिल जाती है।

नजरों की जुबां,

अपनी ख्वाबों की दुनिया में, बसाओ तो सही।
एक दफा इश्क में, हमें आजमाओ तो सही।

नजरों की जुबां तो हम भी जानते हैं, मगर
अपने मुंह से, हाले दिल सुनाओ तो सही।

पत्थर को भी पिघलते देखा है हमने तो,
जरा इश्क की शमां, जलाओ तो सही।

आंधी तूफानों से, कोई कह दे आज
दम है तो इस लौ को, बुझाओ तो सही।

खिलौने खरीद कर ला देंगे आपको, तब तक
मेरे दिल से अपना दिल बहलाओ तो सही।

एक अधूरा ख्वाब

एक अधूरा सा ख्वाब दिल में छुपा रखा है।
जैसे किसी सुलगती चिंगारी को दबा रखा है।

यह चुभता तो बहुत है शूल बन कर, मगर
इसने मेरी जीने की ख्वाहिश को बढ़ा रखा है।

कागज कलम पर ही सही अरमां तो निकले
हर एक पन्ने पर उसका नाम लिखा रखा है।

CLICK & SUPPORT

मुस्कुराहट और खुशबू कभी कम नहीं होती
लाख गुलाब भले ही कांटों से घिरा रखा है।

माना कि मेरे सनम पत्थर के सनम हैं
लेकिन मैंने उस पत्थर का नाम खुदा रखा है।

मेरा शहर

सुबह का टूटा हुआ, ख्वाब बन कर रह गया।
मेरा शहर, मेरे लिए इक याद बन कर रह गया।

आंखों में फिरती हैं, आज भी सूरतें जिनकी,
लोगों का वो हुजूम सैलाब बन कर बह गया।

सहज कर रखी हैं निशानियां, दिल के कोने में,
किताबों में छुपा हुआ गुलाब बन कर रह गया।

हरपल जिक्र उसी का, आ जाता है लबों पर,
मेरे गीत और ग़ज़लों का अस्बाब बन कर रह गया।

पहचानी सी सड़कों पर, कब अजनबी बन गए हम,
दिल में उठते हुए, सवाल का जवाब बन कर रह गया।

मेरे अधूरे ख्वाब

आंखों की नींदें मांगती हैं ज़बाब।
कब पूरे होंगे मेरे अधूरे ख्वाब।

कागज कलम मिल गया तो सूची बना डाली,
लिख दीं दिल की हसरतें बेहिसाब।

कब तक गुजारनी पड़ेंगी रातें यूं जाग कर,
जैसे कांटों के बीच में रहता है गुलाब।

दूर से चांद को ताकना अब नहीं भाता,
उसे पाने का कोई जतन करो जनाब।

जाने क्यों ये

जाने क्यों ये, ऐसा दस्तूर होता है।
जो दिल के करीब है, वो हमसे दूर होता है।

चाहते हैं जिसे, खुद से भी ज्यादा,
मिलने को, वो हमें मजबूर होता है।

माना दुनियामें, रिवाज है जुदा होने का
जो जुदा है, वो ख्वाबों में मशहूर होता है।

सुनहरी यादों, सौगात में मिली, लेकिन
उनके बिना, जिंदगी में खालीपन जरुर होता है।

सुशी सक्सेना इंदौर

फ्लैट नंबर – 501- A
आल्ट्स रेजीडेंसी, प्लाट नंबर – 361,
सेक्टर – N, सिलिकॉन सिटी, इंदौर
मध्य प्रदेश
पिन नंबर – 452012

Leave A Reply

Your email address will not be published.