KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

इंसान हो तो सदा सदकर्म करो

0 100

इंसान हो तो सदा सदकर्म करो

इंसान हो तो सदा सदकर्म करो
या चुल्लू भर पानी में डूब मरो

चार दिन की चटक चाँदनी
फिर तो अंधेरी रात है
ये जीवन अभिनय मंच है
कुछ नहीं  संग में जात है

साँसे मिली है गिनती में
कभी इसे ना ब्यर्थ करो 

मुठ्ठी बाँध आए जग में
बस हाथ पसारे जाना है
रंगमंच रे दुनिया सारी
सपनों का ताना बाना है

पलक खोलकर देख मुसाफिर
हवाओं  में ना रंग भरो

कामनाओं की तप्त मरू पर
मन मृगा भटका जाए
जाने कब तृष्णा मिटेगी
मृत्यु बैठी है घात लगाए

तोड़ दो बंदिशे ब्यर्थ की
मन पावन निर्मल करो

मन चंगा तो कठौती में गंगा
कहते सब मुनि ज्ञानी हैं
मन को ही साध ले प्यारे
जिंदगी  आनी जानी है

काम क्रोध औ मद लोभ से
मन को सदा विजयी करो

सुधा शर्मा
राजिम छत्तीसगढ़

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.