KAVITA BAHAR
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इस फूल में कांटा है

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इस फूल में कांटा है ,
सौदा ए दिल घाटा है ।
बाहर से रौनक लगे
अंदर से सन्नाटा है।।
चुमना चाहो इन्हें , तो ये चुभेेंगे।
हर बात पे तुम्हें , ये तौलेंगे ।
इनके तेवर है लंबे …..
हम भले ही नाटा हैं।
सौदा ना कर घाटा है ।
इस फूल……..
कोरे कागज पे, कोई भी लिखता है ।
स्याह की बूंद भी,ज्यादा दिखता है।
कागज सा हमें फाड़के
मारा किसी ने चाटा है ।
सौदा ना कर घाटा है ।
इस फूल……..
आज तक हमने, एक चुना था ।
संग जीवन के, सपना बुना था ।
पर वह भले ठहरे…
हमको जग में बांटा है ।
सौदा ना कर घाटा है।
इस फूल…….

©मनी भाई,बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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