फरवरी महिना पर कविता

फरवरी महिना पर कविता

लोग कहते हैं इश्क़ कमीना है
हम कहते हुस्न का नगीना है।
देखो चली है मस्त हवा कैसी
आ रहा मुहब्बत का महीना है।

जनवरी संग गुजर गयी सर्दी
प्यार का ये फरवरी महीना है।
वेलेंटाइन तो पश्चिमी खिलौना
यहां तो सदियों से ही मनता
रहा मदनोत्सव का महीना है।

सोलहो श्रृंगार कर रही सजनी
आ रहा उसका जो सजना है।
यमुनातट आया कृष्ण कन्हैया
संग राधा नाचती ता-ता थैया है।
मुरली के धुन पर गोपियां क्या?
वृंदावन की नाची सारी गैया है।

फूलों की सुगंध देखो मकरंद
कैसा उड़ता फिरता बौराया है।
बागों में लगे है फूलों के झूले
झूलती सजनी संग सजना है।
धरा पे पुष्पों सजा ये गहना है
आया मुहब्बत का ये महीना है।

वंसतोत्सव में झूमता सदियों से
आर्यावर्त का नाता ये पुराना है
प्रेम की हम करते हैं इबादत
नही वासना का झूठा बहाना है।

कृष्ण राधा का मीरा का माधव
रति कामदेव का ही ये महीना है
आया मुहब्बत का ये महीना है
इश्क़ वाला ये फरवरी महीना है।   

© पंकज भूषण पाठक “प्रियम”

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page