KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

इश्क तुझे, मेरे साथ , ऐसा ना करना था- मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न की रोमांचक गीतों में से

इश्क तुझे, मेरे साथ , ऐसा ना करना था ।

चैन लिया, दर्द दिया
यादों में आंखे भर दिया .

दो पल ही सही, संग मेरे चलना था ।
इश्क तुझे, मेरे साथ,ऐसा ना करना था।

अभी अभी तो, दोस्ती हुई थी
खुलके मैंने ,बातें ना की थी
बुझ गया दीया ,रोशनी से पहले
उजाले मेरे , रातें ना थी
धुआं धुआं ,मैं हुआ ,अधूरा ना जलना था।

इश्क तुझे मेरे साथ, ऐसा ना करना था।

तुमसे ही तो जीने की वजह मिली थी
तुम ही नहीं तो जीना क्या?
बुझती नहीं प्यास इन आंखो की,
तुम ही नहीं तो ,पीना क्या?
हाथ मेरा थामा क्यों ? जब सफ़र में छोड़ना था।

इश्क तुझे ,मेरे साथ, ऐसा ना करना था।

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