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जब मैं तनहा रहता हूँ

जब मैं तनहा रहता हूँ
मनीभाई नवरत्न

जब मैं तनहा रहता हूँ

जब मैं तनहा रहता हूँ।
खुद से बातें करता हूँ ।
सुख की,दुख की ।
छांव की, धुप की ।
गलतियों पर सीख लेता हूँ ।
कसम खाता हूँ आगे से,
इन्हें ना दुहराने की ।
जीत पर बधाई देता हूँ ।
उत्साह बढ़ाता हूँ,
नित आगे बढ़ने की ।
कारनामे गढ़ने की ।
मुश्किलों से लड़ने की ।
एक तारा आसमाँ में जड़ने की ।
कभी जो वायदे किए जिन्दगी से,
उन्हें निभाता हूँ ।
धीमी चाल तेज करता हूँ ।
चलते चलते फिर कहीं खो जाता हूँ ।
हृदय की उर्वरा भू पर,
स्वप्नों के बीज बोता हूँ ।
उसे हकीकत होता सोच
मुस्कुराता हूँ ।
हाँ बड़ा अच्छा लगता है मुझे,
जब मैं तनहा रहता हूँ ।

मनीभाई नवरत्न

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