KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जिंदगी गुजारेंगे कैसे

जब कोई किसी से प्यार करता है तो उसकी व्यथा उसको ही पता रहती है

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जिंदगी गुजारेंगे कैसे

तेरे बिन ये जिंदगी गुजारेंगे कैसे,
रूठ कर जो जाओ तो मनायेंगे कैसे,
सुबह की धूप की तरह तेरी यादों का सिलसिला है,
दिल से तेरी यादों को भूल पाएंगे कैसे,

कुछ ख़्वाब ना पूरे होंगे,
कुछ अफ़सानों का कारवाँ गुजरेगा,
जब रुख्सत होगी मेरी अरमानों की डोली,
टूटने से खुद को हम रोक पाएंगे कैसे,

हर मुसाफिर में तेरी तस्वीर तलाशेंगे,
जो तू न मिली तो खुद को मनायेंगे कैसे,
वो वादे वफ़ा की वो किस्से कहानियाँ,
दर्द-ए-दास्ताँ हम सुनाएँगे कैसे॥

@साहित्यकार आदित्य मिश्रा
दक्षिणी दिल्ली, दिल्ली 9140628994

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