जीवन एक नदी /कुलेश्वर जायसवाल 

ये जीवन तो नदी के समान है,

जीना है तो चलना पड़ेगा सदा ll

राह में आएगा कई पर्वत विशाल l

बिखर न जाना खुद को संभाल ll

हौसलों से ही अब तो उड़ान है,

धीर – वीर कैसे हारेगा भला l

ये जीवन तो नदी के समान है,

जीना है तो चलना पड़ेगा सदा ll

मर्म स्पर्शों से शिलाओं को पार कर लो l

भूल जाओ द्वेष ईर्ष्या सब से प्यार कर लो ll

ताकत से भले जीत जाए इंसान है,

पर मृदुवाणी से मन जीते जाते सदा l

ये जीवन तो नदी के समान है,

जीना है तो चलना पड़ेगा सदा ll

चारों ओर यहाँ विषधर हैं खड़े l

पर चंदन को कहा फर्क है पड़े ll

परहित जो जीये जीवन महान हैं,

इसलिए मानव जीवन है सबसे जुदा l

ये जीवन तो नदी के समान है,

जीना है तो चलना पड़ेगा सदा ll

कुलेश्वर जायसवाल
कुलेश्वर जायसवाल

📝 कवि परिचय

कुलेश्वर जायसवाल ‘कुलीन’ छत्तीसगढ़ के एक प्रतिभाशाली युवा कवि, लेखक और प्रेरक वक्ता हैं। उनका जन्म 22 जून 1997 को ग्राम सेमरिया, जिला कबीरधाम (कवर्धा) में हुआ। उनके माता-पिता का नाम श्रीमती सुनीता जायसवाल और श्री मोहित जायसवाल है। उन्होंने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग से M.Sc. (Biotechnology) एवं B.Ed. की शिक्षा प्राप्त की। विज्ञान की पृष्ठभूमि के बावजूद उनकी गहरी रुचि हिंदी साहित्य में रही है।

डिजिटल मंच स्टोरीमिरर पर उन्हें “Literary Colonel” की उपाधि मिली है। उनकी प्रमुख रचनाओं में “जीवन एक नदी”, “प्रकृति का आभार” और “मेरा गांव” शामिल हैं, जिनमें जीवन संघर्ष, प्रकृति प्रेम और ग्रामीण संस्कृति का सुंदर चित्रण मिलता है।

कुलेश्वर ‘कुलीन’ अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों और प्रेरणा का संदेश देने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

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